मधुशिल्पी Shilpi Saxena
Romance
तुम समझते नहीं हालात मेरे नादां दिल के,
हम वक़्त की आँधी के सताए हुए हैं।
मिला जो आसरा हमें ज़रा सी रौशनी से,
ऐसी रौशन शमां के हम सताए हुए हैं।
खेलकर दिल से मेरे जो हमें ठुकरा गए,
ऐसे मोहब्बत के आशिक के हम सताए हुए हैं।
हिंदी दिवस
मेरा भारत
माँ
मिट्टी का इंस...
देरी
जब सब बदल जाए
कही अनकही
गहराई प्रेम क...
लेखन
आपकी चाहत, मोहब्बत,उंसियत का है असर। आपकी चाहत, मोहब्बत,उंसियत का है असर।
तकिये से पूछो बारिश में मैं कितना अश्क बहाया था ! तकिये से पूछो बारिश में मैं कितना अश्क बहाया था !
खास दिन का और महज़ चंद रुपयों की चीज़ का मोहताज कोई क्यूँ रहे। खास दिन का और महज़ चंद रुपयों की चीज़ का मोहताज कोई क्यूँ रहे।
निक्टर प्रेमवासना की दिव्य कली है! निक्टर प्रेमवासना की दिव्य कली है!
तुम्हारी आहट पर मुझे कुछ पूर्णता का आभास तो हो। तुम्हारी आहट पर मुझे कुछ पूर्णता का आभास तो हो।
लड़का हूँ न allowed नहींं है आजकल के बाजार में। लड़का हूँ न allowed नहींं है आजकल के बाजार में।
माना मुश्किलें हैं इस संसार में आसान नहीं कुछ भी इतना, माना मुश्किलें हैं इस संसार में आसान नहीं कुछ भी इतना,
तू क्यों आता है लौट के जाने के लिये कैसे खुद में थाम लूँ, बसा लूँ खुद में तुझे। तू क्यों आता है लौट के जाने के लिये कैसे खुद में थाम लूँ, बसा लूँ खुद में तु...
फासलों की कशिश से कहाँ मरती है प्रेम की चरम। फासलों की कशिश से कहाँ मरती है प्रेम की चरम।
तूने छुआ जो रूह आ गई तो मुझे खुद से भी प्यार है। तूने छुआ जो रूह आ गई तो मुझे खुद से भी प्यार है।
तुम्हें समेट लिया है भीतर जैसे जाड़ों में समेट लिए जाते हैं धरती पर बिखरे पारिजात। तुम्हें समेट लिया है भीतर जैसे जाड़ों में समेट लिए जाते हैं धरती पर बिखरे प...
रख सकता था तुम्हे और तुम्हारे उस मखमल सम मृदुल एहसास को। रख सकता था तुम्हे और तुम्हारे उस मखमल सम मृदुल एहसास को।
तुम और तुम्हारी यादें...क़ैद ही रहना चाहती हैं मेरे दिल के किसी अंधेरे कोने में। तुम और तुम्हारी यादें...क़ैद ही रहना चाहती हैं मेरे दिल के किसी अंधेरे कोने ...
मेरी कल्पनाओं से बढ़ कर हो तुम मेरे ख्वाबों को पूरा सिर्फ करती हो तुम। मेरी कल्पनाओं से बढ़ कर हो तुम मेरे ख्वाबों को पूरा सिर्फ करती हो तुम।
वो एक दूसरे को पीठ ज़रूर किए बैठी है लेकिन एक दूजे से बेइन्तहा इश्क़ भी किए बैठी है। वो एक दूसरे को पीठ ज़रूर किए बैठी है लेकिन एक दूजे से बेइन्तहा इश्क़ भी किए ...
पर ये मुममिन नहीं और इसी तन्हाई में गुमसुन अकेला बैठा मैं। पर ये मुममिन नहीं और इसी तन्हाई में गुमसुन अकेला बैठा मैं।
उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई। उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई।
अब तो आ भी जाओ प्रिये तुम, भाता कोई और नहीं। अब तो आ भी जाओ प्रिये तुम, भाता कोई और नहीं।
ख़त लिख रहा हूं, जिंदगी विरान है। ख़त में भरता हूं अक्स, ख़त लिख रहा हूं, जिंदगी विरान है। ख़त में भरता हूं अक्स,
बेशक तुम मत आना... बस कह देना की आऊंगा। बेशक तुम मत आना... बस कह देना की आऊंगा।