Ishita Gupta
Tragedy
पंख सारे काट डाले
थम गई उड़ान है
फूल से कोमल कभी
उसके एहसास है
खिलखिलाती थी जो कल तक
आज वह ही तो गुमनाम है
वह ही तो गुमनाम है।
पहली मुलाकात
सच्चा प्यार
"ख़यालों का स...
चांदनी बरसात
दिवाली खास थी
खुशबू्
उर्जा का स्रो...
ज़िन्दगी ! कै...
ख्वाबों की रो...
ना रही
काश तुम होते तो यूं न नम ये आंखें होती, दिल से दिल मिलते तो कुछ फिर बातें होती, काश तुम होते तो चा... काश तुम होते तो यूं न नम ये आंखें होती, दिल से दिल मिलते तो कुछ फिर बातें होती,...
तन ढाँपने को भी कई बार मय्यसर नहीं होता है, बेचारों का जीवन बस ऐसे ही गुजरता है। तन ढाँपने को भी कई बार मय्यसर नहीं होता है, बेचारों का जीवन बस ऐसे ही गुजरता...
नहीं होता मुझसे यूं अकेले इंतजार करना नहीं होता खुलेआम आंखों का रोना नहीं होता मुझसे यूं अकेले इंतजार करना नहीं होता खुलेआम आंखों का रोना
अब भी हमारी निगाहें देखेंगी उम्मीद भर के, अब हम भी निगाहें उनसे उतार गये। अब भी हमारी निगाहें देखेंगी उम्मीद भर के, अब हम भी निगाहें उनसे उतार गय...
कल छली गई थी मैं, कल फिर छली जाऊंगी, कब तक खुद को अबला कहकर, यूंही पछताऊंगी! है बदन मेरा भी छल... कल छली गई थी मैं, कल फिर छली जाऊंगी, कब तक खुद को अबला कहकर, यूंही पछताऊंगी! ...
यूँ आएंगे वो इस कदर जिनके गम में ये दर्द पाई है। यूँ आएंगे वो इस कदर जिनके गम में ये दर्द पाई है।
जिंदगी में ख़्वाब और हक़ीक़त रेल की पटरियों जैसे होते है.... साथ होकर भी दूरी बनाकर रहते जिंदगी में ख़्वाब और हक़ीक़त रेल की पटरियों जैसे होते है.... साथ होकर भी दूरी बनाक...
अब तो मेरी कलम भी कहती है रुक रुक ओ ! सिपाही.. अब तो मेरी कलम भी कहती है रुक रुक ओ ! सिपाही..
दिल के बदले 'अस्मत" गंवा बैठी ! दिल के बदले 'अस्मत" गंवा बैठी !
कोई खोट या कमी थी जो भी मुझे बताते, करते सुधार ना हम तो आप छोड जाते। अपनो को इस तरह यूं जाता नही भु... कोई खोट या कमी थी जो भी मुझे बताते, करते सुधार ना हम तो आप छोड जाते। अपनो को इस...
घुँघटा बैन करवा दे भरतार, महीना आया गर्मी का, रोटी पोऊँ आवै पसीना, भीगे मेरा शरीर, घुँघटा सरक गय... घुँघटा बैन करवा दे भरतार, महीना आया गर्मी का, रोटी पोऊँ आवै पसीना, भीगे मेरा ...
शहर की जहरीले असर में वो भी आ गया, मात-पिता को भूल कर चकाचौंध में खो गया । शहर की जहरीले असर में वो भी आ गया, मात-पिता को भूल कर चकाचौंध में खो गया ।
आज सच्चाई को हिनता और झूठे को पूजनीय मानते हैं। आज सच्चाई को हिनता और झूठे को पूजनीय मानते हैं।
घर में सहेजी हुई यादें भी जल गयी, मजहब के नाम पर कैसी लूट मची घर में सहेजी हुई यादें भी जल गयी, मजहब के नाम पर कैसी लूट मची
जब भी चाहा साथ तुम्हारा । तुम साथ नहीं .........थे । जब भी चाहा साथ तुम्हारा । तुम साथ नहीं .........थे ।
जिंदगी सड़कों पर , लाचार बैठी है। जिंदगी सड़कों पर , लाचार बैठी है।
लगता है तू भूल गई है कि कैसे हम सुबह साथ में चाय पीते थे लगता है तू भूल गई है कि कैसे हम सुबह साथ में चाय पीते थे
क्या मेरे बिना काश कोई मुझे पूछ लेता, ए काश कोई मुझसे पूछ लेता। क्या मेरे बिना काश कोई मुझे पूछ लेता, ए काश कोई मुझसे पूछ लेता।
संविधान और कानून का सम्मान करता है। चाहे वो किसी भी जाति धर्म का हो। संविधान और कानून का सम्मान करता है। चाहे वो किसी भी जाति धर्म का हो।
चलो माना वक्त के साथ चीजें बदलतीं हैं शायद रिश्तों में कड़वाहट भी आ जाता है चलो माना वक्त के साथ चीजें बदलतीं हैं शायद रिश्तों में कड़वाहट भी आ जाता है