ना कर
ना कर
तू शरमाती है ना तो
मेरी बाहों में शरमाया कर
पास आने का बहाना ढूंढ
बस दूर ना जाया कर
तू इतना तो जानती है मुझे
वो तेरे साथ रहें मुझे पसंद नहीं
यूँ बेमतलब जलाया ना कर!
तूझे आजाद होने का हक है
वो कर जो तू करना चाहें
बस जाए चाहे जहाँ भी तू
वापस लौट यहीं पर आए
चाहती है तो इतना कर
बार बार इस चाहत को
बेमतलब आजमाया ना कर!
मैं सीधा तो बहुत हूँ
शरारतें कभी करता नहीं
अब आंखें गड़ा कर मत देख
मैं तुझसे अब डरता नहीं
सिर्फ पिघल जाता हूं यही कि
तू निगाहें उठाकर शरारती
अंदाज में बुलाया ना कर!
मुश्किल है बाहों में जकड़े रखना
तू हवाओं जैसी चंचल है
तुझे छू लो एक बार तो जाने क्यों
बार-बार मन में होती हलचल है
एक शर्त मेरी भी मान लें तू
आ गई एक बार बाहों में तो
वापस लौट कर जाया ना कर!

