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Sanjay kumar Yadav

Romance Others

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Sanjay kumar Yadav

Romance Others

मुश्किल हैँ

मुश्किल हैँ

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रूह तक उतर गये हो तुम मेरे 

अब तुमको भूल जाना मुश्किल है


सोचा था कहीं तो अकेला छोड़ दोगे तुम मुझे 

अब परछाई से भी साथ छुड़ाना मुश्किल हैं


ये जो हवाएं आ रही हैं तुमको छूकर

इन हवाओं में कहीं उड़ ना जाऊँ मैं


दिल को तो एक बार समझा भी लूँ मैं अगर

इन दिल के धड़कनों को समझना अब मुश्किल हैं


खुली आँखों से अब सपने देखने लगा हूँ मैं तुम्हारी

बंद आँखों में भी तस्वीर तुम्हारी है


तुम हो ही खूबसूरत इतना

अब ये निगाहें तुम से हटाना मुश्किल है


क्यूँ नहीं आकर कह देती तुम निर्मल से

अब तुम्हारे बिना ये जिंदगी गुजारना मुश्किल है ...



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