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हरीश कंडवाल "मनखी "

Romance

3  

हरीश कंडवाल "मनखी "

Romance

"फलक"

"फलक"

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190


(पति पत्नी से )


चलो कुछ पल साथ बिता लेते हैं

आज फिर चोरी से मुस्करा लेते हैं

जिंदगी सिर्फ जिम्मेदारियों के लिए नहीं

चलो कुछ देर के लिए पहले जैसे हो लेते हैं।


(पत्नी पति से)


कुछ पल के लिए क्यो हमेशा साथ रहते हैं

चोरी से क्यो खुलकर मुस्करा लेते हैं

हम तो जिम्मेदारी के साथ मोहब्बत कर लेते है

फिर से हमेशा के लिये पहले जैसे हो लेते हैं। 


(पति पत्नी से)


कह तो सही रहे हो तुम फिर वही दोस्त बन लेते हैं

जो भी गिला शिकवा है खत में लिख लेते हैं

छोड़ दो कुछ पल के लिये यह फोन

साथ मे बैठकर अंताक्षरी खेल लेते हैं। 


(पत्नी पति से)


आज चलो खुलकर हँस लेते हैं

कुछ नहीं तो पुरानी यादें ताजा कर लेते हैं

फलक तक साथ चलने का वादा किया है

चलो मिलकर वादे को फिर से फलक पर लिख लेते हैं। 


(पति पत्नी दोनों एक साथ) 


जीवन में प्यार का गीत है गुनगुनायेंगे

लाख तूफान है, उम्मीद का दिया जलायेंगे

हाथ में हाथ पकड़कर जीवन का जश्न मनाएंगे

चलो फलक तक नहीं ताउम्र साथ निभायेंगे।


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