मुकम्मल इल्तिज़ा
मुकम्मल इल्तिज़ा
अगरचे इश्क करना ही है
तो खुदा से कीजिए ।
मोहब्बतों के आगाज़ का
खुलेआम चर्चा कीजिये ।।
किसने कहा की गुनाहगार हैं
आप, के मोहब्बत कर बैठे ।
इन्सान से मोहब्बत करने का
साहिब नतीजा तो देख लीजिए।।
ये पल पल बदलता है
किसी एक पर न टिकता है ।
चूस लेता है भँवरों सा जिस फूल को
तो फौरन दूसरा बदलता है ।।
बदल जाना इसकी फ़ितरत है
काम होते ही निकलता है ।
लिहाजा बात पर मेरी
इक बार गौर तो कीजिये ।।
अगरचे इश्क करना ही है,
तो खुदा से कीजिए ।
मोहब्बतों के आगाज़ का
खुलेआम चर्चा कीजिये ।।
अरूण कब कहता है अरे साहिब
कि मोहब्बत मत कीजिये ।
मगर इक गुजारिश ही तो है,
आपसे कि इसकी इज्जत कीजिये ।।
चूमिये चूम चूम कर
घर को भर दीजिये
एलान भी कीजिये ।
बस इतनी सी इल्तिजा है मेरी के
अपने महबूब को
बदनाम हर्गिज़ न कीजिए ।।
अगरचे इश्क करना ही है
तो खुदा से कीजिए ।
मोहब्बतों के आगाज़ का
खुलेआम चर्चा कीजिये ।।
