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DR ARUN KUMAR SHASTRI

Fantasy Inspirational

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DR ARUN KUMAR SHASTRI

Fantasy Inspirational

मुकम्मल इल्तिज़ा

मुकम्मल इल्तिज़ा

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अगरचे इश्क करना ही है 

तो खुदा से कीजिए । 

मोहब्बतों के आगाज़ का 

खुलेआम चर्चा कीजिये ।।

किसने कहा की गुनाहगार हैं 

आप, के मोहब्बत कर बैठे ।

इन्सान से मोहब्बत करने का 

साहिब नतीजा तो देख लीजिए।।

ये पल पल बदलता है 

किसी एक पर न टिकता है ।

चूस लेता है भँवरों सा जिस फूल को 

तो फौरन दूसरा बदलता है ।।

बदल जाना इसकी फ़ितरत है 

काम होते ही निकलता है ।

लिहाजा बात पर मेरी 

इक बार गौर तो कीजिये ।।

अगरचे इश्क करना ही है, 

तो खुदा से कीजिए । 

मोहब्बतों के आगाज़ का 

खुलेआम चर्चा कीजिये ।।

अरूण कब कहता है अरे साहिब

 कि मोहब्बत मत कीजिये ।

मगर इक गुजारिश ही तो है, 

आपसे कि इसकी इज्जत कीजिये ।।

चूमिये चूम चूम कर 

घर को भर दीजिये

एलान भी कीजिये ।

बस इतनी सी इल्तिजा है मेरी के 

अपने महबूब को

बदनाम हर्गिज़ न कीजिए ।।


अगरचे इश्क करना ही है 

तो खुदा से कीजिए । 

मोहब्बतों के आगाज़ का 

खुलेआम चर्चा कीजिये ।।


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