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मुझको तेरा अंदाज़

मुझको तेरा अंदाज़

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मुझको तेरा अंदाज़ समझ में आता है

मिन्नतें, दुश्वारियां, हर राज़ समझ में आता है


जिसकी दुहाई देते हो उसी को नोचते हो

मुझे तुम्हारा दोगला समाज समझ में आता है


नफ़रत भारी है इस कदर मोहब्बत पर कि

मुझे ज़माने का कल और आज समझ में आता है


ज़ुल्म करने वाले बहुत सफेदपोश होते हैं

मुझे मासूम चेहरे में छिपा बाज़ समझ में आता है


दे दिया होता जो अधिकार तो तुम औकात पे आते, सो

मुझे बेटियों के रौंदने का रिवाज़ समझ में आता है


इतना ज़ुल्म करके खुदा से नज़रें कैसे मिलाओगे

मुझे न दलील न कोई आवाज़ समझ में आता है



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