STORYMIRROR

Salil Saroj

Abstract

4  

Salil Saroj

Abstract

खुदाई से मेरा कोई सरोकार नहीं है

खुदाई से मेरा कोई सरोकार नहीं है

1 min
372

खुदाई से मेरा कोई सरोकार नहीं है,

मेरे घर में अभी कोई बीमार नहीं है।


जनता के पास सब कुछ तो है,

बस,एक छत और चार दीवार नहीं है।


कैसे मोहब्बत जवान होगी यहाँ पर,

मेरे शहर में कोई चार-मीनार नहीं है।


बच्चों को कैसे ले जाऊँ गाँव अपने,

वहाँ रात भर जागता बाज़ार नहीं है।


मैं ज़माने की नज़र में आऊँगा देर से,

मेरे हाथ में कलम है,हथियार नहीं है।


नौकरी मिलने से शुकून नहीं मिलता,

इन्सान क्यों इतना समझदार नहीं है!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract