STORYMIRROR

Juhi Grover

Romance

4  

Juhi Grover

Romance

मुझे पता है

मुझे पता है

1 min
281

मुझे पता है,

ढूँढ रही हैं ख़ामोश नज़रें तेरी मुझे रोकने के लिए,

मैं भी कहाँ कहाँ नहीं छुपा तुझसे दूर होने के लिए,

तुमने मुझे हर बार ढूँढ निकाला है कहीं न कहीं से,

और मैंने हर बार नई जगह खोजी है छुपने के लिए।


मुझे पता है,

तुम दूर होना नहीं चाहती, रोकती हो मेरे ही लिए,

मैं दूर जाना चाहता हूँ तुझसे, छुपता हूँ तेरे ही लिए,

मगर हमारी ये कैसी चाहत है, मिल जाते हैं हर बार,

हम बस जीना चाहते हैं, तेरी मेरी हसरतों के लिए।


मुझे पता है,

तू भी ज़िद्द पे है, मैं भी ज़िद्द पे हूँ, एक दूजे के लिए,

हमने ये नहीं देखना कौन जीतता है, किस के लिए,

ज़िन्दगी कोई लुका छुपी का खेल नहीं कि ढूँढते रहें,

ये तो एक एहसास है, उम्र भर साथ निभाने के लिए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance