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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance Tragedy

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance Tragedy

मुझे अकेली बना गया।

मुझे अकेली बना गया।

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बहोत अकेली थी जीवन में,

एक सहारा मुझे मिल गया,

जीवन की ईस पतझड़ को, 

बसंत की तरह महका दिया। 


दिल मेरा मायूस रहता था, 

उसने आकर दिल धडका दिया, 

मेरी धड़कन से ताल मिलाकर, 

मुझे ईश्क का एहसास करा दिया। 


उस के ईश्क का दिल से मैने, 

ईस्तकबाल कर के अपना लिया, 

ईजहार ईश्क का उसे कर के, 

मैने मेरे दिल मे उसको बसा लिया। 


लेकिन ये कैसा तुफान आया, 

वो छोडकर मुझे दूर चला गया, 

मै तो पहले भी अकेली थी "मुरली", 

आज भी मुझे अकेली बना गया।



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