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Sudhir Kumar

Tragedy

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Sudhir Kumar

Tragedy

मत आना मेरी कब्र पर तुम मत आना

मत आना मेरी कब्र पर तुम मत आना

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मत आना मेरी कब्र पर तुम मत आना।

सजदा न करने आना, ना फूल चढ़ाना।


खुलेआम कभी मिलते थे इन राहों पर,

तू सफ़र में रहे है, क़फ़स मेरा ठिकाना।


हर बात पर होता था, तेरा एक बहाना,

मुझे याद करके तुम ना यूं आंसू बहाना।


वो ख़त जो भेजे थे तुझ को लिख कर,

इल्तिज़ा है यह मेरी, इन को न जलाना।


यूं अपनी मोहब्बत को ना रुसवा करना,

पहले से मोहब्बत का दुश्मन है ज़माना।



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