मृगतृष्णा
मृगतृष्णा
न ख्वाबों से कोई रिश्ता
न नींद से कोई दुश्मनी
बावजूद इसके
ख़ुद को बेचैन किए लोग
तलाश में सकुन की
शायद और संभवतः
अपनों से परेशान
और एक उम्मीद
गैरों से एहसान की
परंतु ग़ैर खुद
परेशान अपनों से
आखिर कब तक वह साथ
या सहारा दे सकता है
मृगतृष्णा सी इन रिश्तों
की खोज में
आखिर कब तक
ऐसा लुका छिपी का खेल
खेला जा सकता है
फिर वही बात
शायद और संभवतः
तब तक
जब तक ठोकरों से
छलनी छलनी न हो जाए
सारे रिश्ते नाते ।
