STORYMIRROR

Manisha Patel

Abstract Others

4  

Manisha Patel

Abstract Others

मोहन

मोहन

1 min
330

साँवली सलोनी छवि

अधर सोहे बाँसुरी

मोर पंख शीश सोहे

मृदु हँसी तिहारी।

कालिंदी बहत कारी

व्रजधाम सुख कारी

नंदलाल के सुहावे

तट यमुना प्यारी।

चोरी पर सीनाजोरी,

छेड़े करे बरजोरी,

मटकी फोरी मोहन

करे माखन चोरी।

नयन पट पर छायी,

मूरत तेरी कन्हाई

हृदय आनंदित करे

राधे के बनवारी।

बंसी बजावे बिहारी

पद्म लोचन मुरारी

शूक मयूर अरू धेनु

विस्मित जग भारी ।

सूर्य सी कांति तिहारी

चंद्र सी चाँदनी भारी

है नभ सदृश्य तन

ओ पीताम्बर धारी ।

गोपिन भी मन हारी

राधे हृदय की मारी

विनय करती मनु

तारो मुरली धारी।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract