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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Romance

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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Romance

मन तो मन है आकर्षण का

मन तो मन है आकर्षण का

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मन तो मन है आकर्षण का, 

कभी उमड़ा तो कभी शान्त। 

दृश्य इसकी कल्पना है, 

और मंथन इसका सार।

मोहब्बत को इतना ही इंतजार,

तू वादा निभाने आ जान निसार।

दिल तेरी दुआ में धड़कन बना प्यार ,

गनीमत ना हो जिन्दगी तेरे बगैर नाकाम।

हमारे लबों पे नाम तेरी दिल्लगी हो,

तो सजदा कर आकर तमन्ना जिंदगी हो।



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