Snehil Thakur
Abstract
मन की केतली ने
मचा रखी है खलबली,
कौन सुने व्यथा
बीती बातों की है नली;
ऐसे तो हर कोई
यहां रिश्ता जताता है,
पर असल में कहां
सच्चाई से निभाता है;
प्रत्येक क्षण मैंने
कई वेदनाएं
संभाले रखा है,
अर्णवी केतली में
खुद को
मौन बनाए रखा है।
चंपी जिंदगी क...
शक्ल दिखाने आ...
अतीत
संयोग
यथार्थ
करेले का स्वा...
पहली मुलाकात....
मन की केतली
जीवन का अफसान...
तेरा प्यार
नही हुआ है,प्रकृति,ऋतु में कोई भी परिवर्तन फिर भी सबको मुबारक अंग्रेजी नववर्ष तन. नही हुआ है,प्रकृति,ऋतु में कोई भी परिवर्तन फिर भी सबको मुबारक अंग्रेजी नववर्ष...
क्योंकि अपनों का साथ ही तो है, मंजिल खुशियों की। क्योंकि अपनों का साथ ही तो है, मंजिल खुशियों की।
कहां खो गए वो हँसीन पल क्यों गुजर गए बचपन के कल. कहां खो गए वो हँसीन पल क्यों गुजर गए बचपन के कल.
दौड़ी चली आय कान्हा की राधा, कान्हा जब मुरलिया मधुर बजाय। दौड़ी चली आय कान्हा की राधा, कान्हा जब मुरलिया मधुर बजाय।
प्रेम के आकाश में नफरत के बादल हैं। प्रेम के आकाश में नफरत के बादल हैं।
शिवजी से वरदान प्राप्त कर निष्कंटक पथ होना था। शिवजी से वरदान प्राप्त कर निष्कंटक पथ होना था।
स्वच्छ रहें सब नदियां नाले कहीं तनिक न प्रदूषण हो, स्वच्छ रहें सब नदियां नाले कहीं तनिक न प्रदूषण हो,
शोक संदेशे सुन सुन कर उर का सारा वो गीत गया। शोक संदेशे सुन सुन कर उर का सारा वो गीत गया।
अस्त हो जाएगा गमगीन सूरज शाम होने से पहले तारे उग आएंगे रात होने से पहले.. अस्त हो जाएगा गमगीन सूरज शाम होने से पहले तारे उग आएंगे रात होने से पहले..
तू निज वृत्ति का स्वामी बन, मन घन तम ना गहन व्याप्त हो। तू निज वृत्ति का स्वामी बन, मन घन तम ना गहन व्याप्त हो।
निर्माण करो सहानुभूति सहयोग अरमानों और आशाओं का I निर्माण करो सहानुभूति सहयोग अरमानों और आशाओं का I
ज़िम्मेदारियों को उठाने वो घर से निकलते हैं ! इस अग्नि के फेरे में पुरुष भी तो जलते हैं ज़िम्मेदारियों को उठाने वो घर से निकलते हैं ! इस अग्नि के फेरे में पुरुष भी तो...
कभी उनको मिले ही नहीं या उन्होंने स्वीकारा नहीं कभी उनको मिले ही नहीं या उन्होंने स्वीकारा नहीं
अमावस की रात जगमग हो और सुबह हो अमावस की रात जगमग हो और सुबह हो
लग रहा है आदमी को घेरे हुये विचार बरस रहे हैं पानी की तरह लग रहा है आदमी को घेरे हुये विचार बरस रहे हैं पानी की तरह
तुम्हारे गालों पर अपने लबों से गिरते शहद की बारिश करने जा रही हूँ आँखें मूँदे महसूस क तुम्हारे गालों पर अपने लबों से गिरते शहद की बारिश करने जा रही हूँ आँखें मूँद...
देह तो एक पड़ाव है इस पर ठहरे लोग नहीं पा सकते प्रेम देह तो एक पड़ाव है इस पर ठहरे लोग नहीं पा सकते प्रेम
कर्तव्य पालन कर जीवन के पथ पर मैं बढ़ रहा हूँ I कर्तव्य पालन कर जीवन के पथ पर मैं बढ़ रहा हूँ I
ज़रा ध्यान रखना अपनी प्रिय मिथ्या का कहीं उसे भगा ना ले जाऊँ। ज़रा ध्यान रखना अपनी प्रिय मिथ्या का कहीं उसे भगा ना ले जाऊँ।
सुन्दर दिखता अम्बर भी है जो ठंडी का कोप सहा।। सुन्दर दिखता अम्बर भी है जो ठंडी का कोप सहा।।