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Preeti Sharma "ASEEM"

Tragedy


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Preeti Sharma "ASEEM"

Tragedy


मिट्टी के घर

मिट्टी के घर

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जिंदगी खेल- खेल में, मिट्टी के घर बनाती है। 

और दूसरे ही पल, गिरते ही, जिंदगी बदल जाती है ।

जिंदगी खेल -खेल में, मिट्टी के घर बनाती है।


कितनी हसरतों से, सहेज कर सपनों को, महलों को धीरे -से थपथपाती है।

नन्ही -सी एक ठेस से, रेत -सी जिंदगी की तस्वीरें बदल जाती है।

जिंदगी खेल- खेल में,  मिट्टी के घर बनाती है।


हर बार बिखर के,  फिर से, सपने सहेजती है।

जिंदगी के खेल में, रेत- सी कितनी बार, बनती और बिगड़ती है।

लेकिन यह खेल,  फिर भी...कहां छोड़ती है।



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