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Saleha Memon

Romance Tragedy Fantasy

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Saleha Memon

Romance Tragedy Fantasy

मिलूँगी में तुझे फिर कभी

मिलूँगी में तुझे फिर कभी

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मिलूँगी में तुझे फिर कभी 

कहां, किस तरह, किस वक्त,

पता नहीं,

शायद तेरे उस शहर के

पास में किसी गांव मे

लहराते हुए खेतों में


खिलते फूलों के साथ,

शायद तेरे घर की उस 

छोटी सी छत पे

मंडराते काले बादलों में

टिमटिमाते तारों के साथ,


शायद तेरी आंखों के उस

सफेद से चट्टान में

बनते लाल नदी मे

बहते पानी के साथ,

शायद तेरे उस हाथों में

बनती उल्टी सुल्टी लकीरों में


कभी ना मिलने या ना

मिलानेवली लकीरों के साथ,

शायद तेरी किताबों के उस

जएफ से बनते पन्नों में

धुंधले से लगते वो सारे


हर्फो के ही बीच,

शायद तेरी ग़ज़लों की उस

गहेरी सी गलियों में

बिखरते सवालों जवाबो मे

झलकते ज़्ज़बातो के बीच,

नहीं जानती कुछ भी की

कहां मिलूँगी,


मगर इतना जानती हूं कि

मिलूंगी तुम्हे मे कभी 

शायद उन बातो - मुलाकातों 

से ही बनती वो यादों में

या फिर उस यादों के शहर में

यादों के धागों के बीच में

रह जाती जगह में,


या उस अधूरी मोहब्बत में

होती अधूरी सी मुलाक़ात में,

मैं शायद मिलुँगी तुझे

उस अनजान राह में

एक अजनबी से 

मुसाफिर की तरह।


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