STORYMIRROR

puja babaria

Romance

3  

puja babaria

Romance

महँगा था इश्क़ तेरा

महँगा था इश्क़ तेरा

1 min
275

महंगा था इश्क़ तेरा,

लबों से छलक गया,

रूबरू ना मिला यूं,

तू मौसम का बहाना बना के चला गया।

सफरनामा तो शुरू कर दिया,

अब ख़त्म कहाँ करूँ बेखयाल कर दिया।

महँगा था इश्क़ तेरा,

लबों से छलक गया।


दिल का पहरदार बन के,

तू दिल का मुसाफिर बन गया,

जज़्बात का खिलौना बना के,

तू किस गली में बेचने निकला,

महँगा था इश्क़ तेरा,

लबों से छलक गया।


  

       


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance