STORYMIRROR

Shirish Pathak

Romance

4  

Shirish Pathak

Romance

मेरी सबसे सुन्दर कविता तुम हो

मेरी सबसे सुन्दर कविता तुम हो

1 min
241

तुमने खुद को कभी आईने में देखा है

अक्सर देखती होगी तुम,

तुम एक कविता की तरह हो

जिसको मैं रोज़ पढ़ता हूँ बार बार

 

तुम जब देखती हो मुझको

अपनी आँखों को धीरे से उठाकर

ऐसा लगता है जैसे तुम मुझे बाँध लेती हो खुद में

और खुद से दूर जाने देना नहीं चाहती

 

तुम जब खिलखिला उठती हो

एक बेशकीमती लम्हे

की तरह मैं उसको छुपा लेता हूँ

शायद मैं तुम्हारे लिए भावुक भी हूँ

मेरे लिए तुम बेहद ज़रूरी हो

उसी तरह जैसे किसी बहती हुई

नदी के लिए पानी का होना होता है

 

तुम जब मेरे करीब होती हो

तुमको देखते रहता हूँ मैं एकटक

और तुम बस मुस्कुरा देती हो कुछ सोचकर

जैसे मेरे सारे एहसास को तुम समझ जाती हो

जो सिर्फ तुम्हारे लिए आ जाती है मेरे अन्दर

 

मेरी सबसे सुन्दर कविता सिर्फ तुम हो

जिसको मैं रोज़ एक नए रूप में देखता हूँ

जिसको मैं समझने की कोशिश रोज़ करता हूँ

रोज़ समेटता हूँ और छुपा लेता हूँ

बातें तुम्हारी अपनी उसी यादों भरी तिजोरी में

 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance