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Brijlala Rohanअन्वेषी

Romance Classics Inspirational

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Brijlala Rohanअन्वेषी

Romance Classics Inspirational

मेरी मुरीद

मेरी मुरीद

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दर - दर की ठोकरे खाया हूँ ,मैं ! 

तब जाकर तेरी दर पाया मैं।

बची मेरी आखिरी उम्मीद हो तुम ।               

तुम क्या हो मेरे लिए,

ये किन शब्दों में बयां करूं !

आज तक मुझे वो शब्द ही नहीं मिला

जो तेरी मधुर मुस्कान

भरी मोहब्बत की बखान कर सके।


ईश्वर द्वारा दी गई मेरी सबसे

अनोखी मुरीद हो तुम। 

न जाने तेरी आँखों में कितनी मजबूत

गुरुत्वाकर्षण बल काम करती है !


मैं जहाँ भी रहूं खींचा चला आता हूं,

तेरे पास। तेरी मधुर मुस्कान को

मेरी भी नजर न लगे ! 


पुजता हूँ तुझे,

अपनी मन की मंदिर में ! 

तुझसे ही तेरी मुस्कान की

वरदान रोज माँगता हूँ मैं।


अपनी मुस्कान बनाये रखना ।

आने में भले ही थोड़ी देर हो जाए,

हमें मगर उम्मीद बनाकर

अपनी प्रेम की मजबूती बनाये रखना ।

इस भाव से जीता हूँ ,तुझसे दूर रहकर।


इस आश में की मिलूंगा जरूर

मैं तुझसे एक दिन।

बनाऊँगा तुझे अपनी हमसफ़र

तेरी ही बाँहों में जिंदगी अब बिताऊँगा।

बिछड़कर मैं तुझसे जी न पाऊँगा।


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