मेरी मां नहीं रही
मेरी मां नहीं रही
पिछले वर्ष
जाते हुए पलों की यात्रा
कुछ सुखद नहीं रही
मेरी मां जो नहीं रही
यह दुख तो अब कभी
मेरे दिल से नहीं जायेगा
पहले मेरे साथ रहती थी
अब उन्हें दिल के किसी
पवित्र स्थान पर बिठाकर
रखना है
मन को बनाना है
मेरी मां का मंदिर
उसके नये जन्म की
जन्म स्थली
जहां लेगी वह फिर से जन्म
मेरे साथ साथ
जीवन में चलने के लिए
मैं करूंगी अपनी मां की
मूर्ति स्थापित
और करूंगी मन ही मन
हर पल उनकी पूजा अर्चना
बिना किसी ढोंग, आडम्बर और दिखावे के
मेरा प्रेम ही होगा
उनके लिए चढ़ावा
मेरा दिल ही होगा
उनकी याद की घंटियां
सुबह शाम बजाता
एक शिवाला
मन में वेदना बहुत है
मां साक्षात दर्शन देकर
अपने हाथों से
अब तो खिला ही दो
मुझे प्रेम भरे अपने स्पर्श का
निवाला।
