STORYMIRROR

Mukesh Bissa

Tragedy

2  

Mukesh Bissa

Tragedy

मेरी कहानी

मेरी कहानी

1 min
94


जिसे पाने के लिए सोचा

कभी उसे पाया नहीं

मंजिल की राह में 

हमसफ़र कभी आया नहीं

बस खुद में ही

खोई रहती हूं।


कभी रो देती हूँ

कभी मैं हंसती हूं

कभी खुशी पा लेती हूं

गमगीन कभी हो जाती हूं

बस खुद में ही

खोई रहती हूं।


अपनी मजबूरी को

ताकत अपनी बनाती हूं

तोहमत किसी पर यूँ

ही नहीं लगाती हूं

बस खुद में ही

खोई रहती हूं।


भरोसा सब पे 

नहीं करती हूं

कसौटी पे अपनी

 ही तौलती हूं

बस खुद में ही

खोई रहती हूं।


जो मिल गया

उसे मुक्कदर समझती हूं

जो न मिल पाया

उसे भुला ही देती हूं

बस खुद में 

खोई रहती हूं।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy