STORYMIRROR

Mukesh Bissa

Others

4  

Mukesh Bissa

Others

शेष

शेष

1 min
286


कभी बैठ कर सोचता हूं तो ये लगता है कि

मुश्किल तो हो गए कुछ काम आसान शेष है


उम्मीदें कायम है अभी हौसले ज़िंदा है

मंजिल पर पहुँचने का अरमान अभी शेष है


है दूर अब आदमी इंसानियत और रिश्तों से

आधुनिक दौर में बस नाम का इंसान शेष है


सजा रखे हैं बहुत से ख्वाब इन आँखों में

 अब भी सजावट का बहुत सामान शेष है


बीता दिए फुरसत के हसीं पल उनके साथ

वो खुशनुमा मंजर का एहसास अब शेष है


कहाँ ले चल दिए तन्हा अकेला छोड़ कर

अंदाज ए दिल अर्व इजहार ए दिल शेष है


सुनाते है अब फ्लसाफा इस ज़िन्दगी की

बहुत से दे दिए मगर कुछ इम्तेहान शेष है


अब भी कोई हैं जो उसूलों पर जो चलता हैं

अब भी कुछ लोग हैं जिनके अभी ईमान शेष है


जानने लगे है अब मुझे भी लोग दुनिया में

मगर ख़ुद से ख़ुद की मुलाकात अभी शेष है


रोज़ होती हैं जी भर के बातें उनसे रात भर

पर क्यूं आज भी ये इजहार ए प्यार शेष है


मैं सोचता हूं कह दूं वो सारी बातें दिल की

पर अंदर उठता ये अहम का जलजला शेष है।




Rate this content
Log in