STORYMIRROR

RAVI SHEKHAR

Romance

3  

RAVI SHEKHAR

Romance

मेरी चाह

मेरी चाह

1 min
249

चाहकर भी ना चाह सके तुमको

पाकर भी ना कभी पा सके तुमको,

हसरत आज भी अधूरी है मेरी

कहानी आज  भी अधूरी है मेरी

अपनी किस्मत में ना लिख सके तुमको

चाहकर भी ना चाह सके तुमको

आँखें आज भी वही चेहरा खोजती है

जिसे कभी अपना ना बना सके हम



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance