कलम टूट गई
कलम टूट गई
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लिखना बहुत चाहा मैंने अपने लिए मगर मेरी कलम ही टूट गई,
निभाना चाहा बहुत मैंने रिश्तों को मगर मेरी किस्मत ही रूठ गई,
सब आज अपने बेगाने लगते हैं लगता है कि जैसे रिश्तों की उम्र टूट गई
लिखना बहुत चाहा मैंने अपने लिए मगर मेरी कलम ही टूट गई,
ताउम्र गुलामी की मैंने कि बस सबका साथ मिल जाये,
मगर उम्र के इस पड़ाव पर सबसे मेरी सलामी ही छूट गई
चाहा बहुत है मैंने सबको खुद से भी ज्यादा
ना जाने फिर भी सबकी मुझसे मोहब्बत छूट गई
लिखना बहुत चाहा मैंने अपने लिए मगर मेरी कलम ही टूट गई.......
