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RAVI SHEKHAR

Abstract

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RAVI SHEKHAR

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आज फिर होली है

आज फिर होली है

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मिटा दो मन के मैल को क्यों कि आज फिर होली है

देखो आकर मेरे साथ आज भी वही दोस्तों की डोली है

हसरत बहुत है मेरे दोस्त तुमसे मिलने की, बैठेंगे फिर

साथ प्यार भी होगा , क्यों कि आज फिर होली है

अपनों के साथ रहने की  बात ही निराली  है

मत भूलना इस बार क्यों   कि आज फिर होली है!


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