STORYMIRROR

Yashwant Rathore

Romance

4  

Yashwant Rathore

Romance

जो बताना ठीक नहीं

जो बताना ठीक नहीं

1 min
367

हमारे साथ किसी का होना ठीक नहीं

मेरा अकेला तुम्हें छोड़ जाना ठीक नहीं 


परवाह ग़ैरो की नहीं हैं मुझे 

तुम ही दे देती हो आवाज़ उन्हें 

प्यार में ये हरजाना ठीक नहीं 


बंद आंखों से चल रहा हूँ साथ मनहारी

कभी तुम ही न खोल दो आँख हमारी 

मोहब्बत में ये नज़राना ठीक नहीं 


इश्क़ की आदत सी हैं मुझे 

ये ख़ुमारी इबादत सी हैं मुझे 

फिर भी , यूँ जले को जलाना ठीक नहीं 


जो कहती हो सब सच मान लेता हूँ 

साथ तुम्हारे सिर्फ़ दिल से काम लेता हूँ 

अब कह भी दो जो बताना ठीक नहीं ।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance