STORYMIRROR

VINOD PANWAR पंवार_विनोद

Romance

3  

VINOD PANWAR पंवार_विनोद

Romance

इच्छा

इच्छा

1 min
753


कुछ इस तरह रिश्ता मुझसे बनाना चाहती है

वो पागल जाने कबसे मेरे घर आना चाहती है


फिर मुझे छत पर अकेला बुला लिया उसने

शायद इस बार कुछ जरूरी बताना चाहती है


आंखें बंद कर ली है मुझे कस कर पकड़कर

इरादा नेक नहीं या मुझे आजमाना चाहती है


छुआ लबों को लबों से मेरे और जरा रो पड़ी

कहा अब जीना किसे क्यूँ मर जाना चाहती है


पा तो ली है खुशियाँ सारी मेरे संग रहते हुए

बस तमन्ना बाकी अब घर बसाना चाहती है


यूँ तो बदनाम हैं दोनों मोहब्बत की गलियों में

पर अब तो इश्क़ को पहचान दिलाना चाहती है


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance