STORYMIRROR

VINOD PANWAR पंवार_विनोद

Drama

2  

VINOD PANWAR पंवार_विनोद

Drama

कुछ बातें

कुछ बातें

1 min
386


कमी नहीं है मुझको

अब रुलाने वालों की

राह क्यूँ मैं देखूँ फिर जाने वालों की


फैसले जो भी थे मेरे

सब गलत हुए

अब मान लेता हूँ,


कुछ समझने वालों की

ज़िंदगी खेल है

इसे खेलों कहा लोगों ने,


तो जिंदगी बेहतर होगी

फिर खेल दिखाने वालों की

इश्क़ बदनाम बहुत है

ये जान लिया हमने।


देखी दुकान बाजार में

जो दिल बहलाने वालों की

मेरे हक पर कब्जा जमाने वाली

दुनिया फिर कैसे सुना दूँ

कहानी दान लुटाने वालों की।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama