Dr Lalit Upadhyaya
Drama
मैं मरी हूँ
मेरी आत्मा जिन्दा है,
लोग अब भी मेरी
सूरत पर फिदा है।
दूर हो गए लेकिन
कहाँ हम जुदा है,
आत्मा मेरी, पिंजरे में
बंद परिंदा है।
कल्याणी है ना...
प्रकृति का मं...
उत्तर प्रदेश ...
वोट है जरूरी
ऊंट किस करवट ...
खेला होवे ?
चलें प्रकृति ...
माँ का आशीर्व...
घर में बीते ब...
क्या कहूँ?
तेरे सामने अगर मैं आ भी गया ना मिलेंगे नजर मैंने सोच लिया... तेरे सामने अगर मैं आ भी गया ना मिलेंगे नजर मैंने सोच लिया...
मायके में अतीत अपना आती छोड़ दो कुल की धुरी बनकर जाती हैं रह मायके में अतीत अपना आती छोड़ दो कुल की धुरी बनकर जाती हैं रह
भयंकर रूप और बिखरे बाल है भूत-पिशाच को दूर भगाती है भयंकर रूप और बिखरे बाल है भूत-पिशाच को दूर भगाती है
यमराज नहीं हटा सके, लिपटे जब शिवलिंग, शिव भक्ति के आगे, मन्नत नहीं रही अधूरी।। यमराज नहीं हटा सके, लिपटे जब शिवलिंग, शिव भक्ति के आगे, मन्नत नहीं रही अधूरी।...
जो पत्नी माने है, बराबर साझीदार वो गाड़ी पहुंचती है, नित स्वर्गद्वार जो पत्नी माने है, बराबर साझीदार वो गाड़ी पहुंचती है, नित स्वर्गद्वार
खुले नीलाम्बर की चादर,रंग-बिरंगे रंगों की दुनिया के प्रेमपाश में कैद हो गयी दुनिया सारी खुले नीलाम्बर की चादर,रंग-बिरंगे रंगों की दुनिया के प्रेमपाश में कैद हो गयी दुनि...
लक्ष्मण बने है शेषनाग जी स्वयं विष्णु ही नर रूप में आया।। लक्ष्मण बने है शेषनाग जी स्वयं विष्णु ही नर रूप में आया।।
न पढ़ाई की फिक्र थी न कक्षा की बात उस कमरे में एक भी पुस्तक न थी न पढ़ाई की फिक्र थी न कक्षा की बात उस कमरे में एक भी पुस्तक न थी
तन-मन सर्वस्व खोना पड़ता जब भौतिक सुख की आती बात तन-मन सर्वस्व खोना पड़ता जब भौतिक सुख की आती बात
आदर्श संस्कार अपनी अमीरता है देश की संस्कृति को बचाना है ! आदर्श संस्कार अपनी अमीरता है देश की संस्कृति को बचाना है !
असुरी शक्तियों को, जगा चुका है, तामसिक वृति का हो चुका है इंसान, असुरी शक्तियों को, जगा चुका है, तामसिक वृति का हो चुका है इंसान,
जिनके भीतर प्रतिभा, जैसी कर्म आग होती है। जिनके भीतर प्रतिभा, जैसी कर्म आग होती है।
हारा नहीं, जो जगा हूँ आज...! हारा नहीं, जो जगा हूँ आज...!
किताब के पन्नों की तरह पलट जाए ज़िन्दगी तो क्या बात है ! किताब के पन्नों की तरह पलट जाए ज़िन्दगी तो क्या बात है !
किस को ख़बर, सबसे पहले मिले थे, हम दोनों कहाँ, किस को ख़बर, सबसे पहले मिले थे, हम दोनों कहाँ,
जीवन को जीते रहने का ये, हुनर कहाँ से लाती हो तुम ? जीवन को जीते रहने का ये, हुनर कहाँ से लाती हो तुम ?
ये मानवीय संवेदनाओं को अनछुआ कर देने की आदत ये मानवीय संवेदनाओं को अनछुआ कर देने की आदत
लड़ाई लड़ता अफ़ग़ानों के खिलाफ कई उन्हें पश्चिमी पंजाब की ओर भगाया था लड़ाई लड़ता अफ़ग़ानों के खिलाफ कई उन्हें पश्चिमी पंजाब की ओर भगाया था
प्रेम गहन है...तो मजबूरी में प्रेम विरल है...तो मगरूरी में प्रेम गहन है...तो मजबूरी में प्रेम विरल है...तो मगरूरी में
तेरे साथ बिताए लम्हों का, हर पल बहुत याद आता है। तेरे साथ बिताए लम्हों का, हर पल बहुत याद आता है।