मेरे मरने के बाद
मेरे मरने के बाद
मरी पड़ी थी मैं आस पास मेरे चाहने वाले रो रहे थे,
उसी में से कुछ लोग मेरे मरने का कारण खोज रहे थे।
कुछ लोग कहते यूं अचानक कोई कैसे मर सकता है,
तो कोई कहता घर वालों ने इस मौत में
कोई तो रहस्य छुपा रख्खा है।
जितने मुंह थे उतनी बातें थी
सबकी अपनी-अपनी कोई न कोई कहानी थी।
कोई ढूढ़ रहा था मेरे शरीर पर स्याह निशान
तो कोई मेरे चरित्र का कर रहा था निरीक्षण
किसी को भी मेरे मरने से कोई फर्क नहीं पड़ा था
सभी को मुझे शमशान ले जाने की जल्दी पड़ी थी।
देख रही थी अदृश्य हो मैं उन लोगों को
ये थे वही लोग जिनके लिऐ मैने
अपनी पूरी जिंदगी घुट घुट कर जी थी,
कोई कह न दे दो बातें मुझे मैं पूरी जिंदगी इस बात से डरी थी।
इन लोगों ने तो मेरी अकस्मात हुई मौत को भी न बख्शा
उठा कर मेरे चरित्र पर ऊंगली मेरी लाश पर कालिख मली थी।
मेरे मरने के बाद ये होगा ये सोचकरअचानक मुझे इतनी घबराहट हुई कि मेरी नींद खुल गई
था ये एक सपना ये सोचकर मुझे शांति बड़ी मिली थी।
हुई नई सुबह मैने अपनी खुशियों की रेसिपी बदल दी
दूसरों को खुश करने की जगह अपनी जिंदगी में
अपनी खुशियों को जगह दी।
