मेरा सफर
मेरा सफर
मत पूछो हाल सफर का।
कहीं था अमृत कहीं जहर था।
कहीं मिलेे सुनसान से रास्ते।
कहीं पर रोते कहीं पर हॅ॑सते।
कहीं मुसीबत बनी थी गर्मी।
कहीं हौले हौले आती सर्दी।
कहीं दरख़्त की घनी थी छाया।
कहीं गरीबी कहीं थी माया।
सफर में देखे रंग हजारों।
कैसा भी हो समय गुजारो।
कहीं पर देखे थे पर्वत ऊॅ॑चे।
कल कल नदियाॅ॑ बहती नीचे।
जंगल भी घनघोर मिले थे।
जीव जंतु हर रोज मिले थे।
खग खंजन का गीत सुना था।
भौंरों का संगीत सुना था।
सफर सुहाना बहुत था मेरा।
ख़्याल था दिल में बस एक तेरा।

