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Devendraa Kumar mishra

Romance

4  

Devendraa Kumar mishra

Romance

मधुर मिलन

मधुर मिलन

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आज छनकती पायल,

आज खनकती चूडिय़ां 

आज कूकती कोयल 

झरनों की कल कल हो 

या हो नदियों की छल छल 


सबमें बस एक ही धुन 

पिया आ जाओ, अब न तरसाओ 

अब तो आ ही जाओ 

मधुमास के मधुर पलों में 

देखो प्रकृति भी कैसी सजी हुई 

बोराये है आम, फूल, पत्तों में भी उफान 


ये प्रेम की उड़ान 

तुम्हारी याद उठ रही मन में 

मत व्यर्थ करो ये मौसम ये बहार 

जो भर रही मन में प्रीतम के श्रंगार 

उड़ती धूल में, खिलते फूल में 

प्रीतम प्रीतम की पुकार 


सब अपने अपने प्रेम में देखो, डूबे कैसे बेसुध 

अब न आए तो तुमसे बड़ा निष्ठुर कौन 

और मुझसे बड़ी अभागिन कौन 

आओ मना ले मन के उत्सव 

आओ खिला लें तन के उपवन 

आओ पूरी प्रकृति साथ है 

आओ, आज मधुर मिलन की वासंती रात है।


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