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Shoumeet Saha

Tragedy

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Shoumeet Saha

Tragedy

मदहोश

मदहोश

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बोतलों में डूबते रहे हम 

किसी समंदर में 

डूबते जहाज की तरह,

जब होश आया तो 

बहुत देर हो चुकी थी,

डूब चुके थे हम 

इतनी गहराई में इस बार,

जिसने मदद करना चाहा 

वह मदद कभी पहुँच ही न सकी।


क्यों हुए थे हम 

नशे में चूर इस कदर, 

कि उससे कभी 

उभर ही न सके?

जाने किसकी यादों में 

डूबे थे हम, 

जो खुद का कभी

ख़याल ही न कर सके।


इन शराबों की भी 

अजीब दास्तान होती है ऐ दोस्त,

भले ही बुझा दे प्याली हमारी,

पर हर क़तरे में यादों को 

कभी मिटा न सके... 


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