मौत
मौत
आओ सभी को सच्ची बात बताऊँ
नहीं रूकती रोकने से मौत बार बार दोहरांऊ।
सुला दिए अपनी नींद में इसने क्या राजे क्या शहजादे,
बच नहीं पाए इसके कहर से
हकीम गूरू पैगम्वर जिन्होंने अलख जगाए।
इस मौत ने हर रोज किस्सा अपना दोहराया,
जो पैदा हुआ जगत में उसने आखिर इक दिन जाना,
यही बात सभी को बार बार दोहरांऊ,
आओ सभी को सच्ची बात सुनाऊं।
धन दौलत की लोभी दूनिया
आगे पीछे भागे,
यह सब जान बूझ कर भी करते कई तमाशे,
इन्सान को इन्सान समझ कर मिलने की बात समझाऊं,
आओ सभी को सच्ची बात सुनाऊं।
आकर मानुष जन्म में भी खा रहा है हैबानों का चारा,
पशु पक्षी भी पड़े दुविधा में यह कैसा वक्त निराला,
इन्सान होकर समझो हर आत्मा को यह तुम्हें समझाऊं,
आओ सभी को सच्ची बात बताऊं।
नहीं चलता उसके आगे जोर किसी का,
पहलवान हो या चोर चक्का,
न जाने कब लग जाए किसी को मौत का धक्का।
कर लो नेक कमाई हर पल यह बात तुझे समझाऊं,
आओ सभी को सच्ची बात वताऊं।
नेकी वदी के दो रास्ते हैं कमा लो जो कमाना,
खाली हाथ आए दूनिया में खाली हाथ जाना।
मानुष्य जन्म में आकर वन्दे करले नेक कमाई,
यही वार वार समझाऊं, आओ सभी को सच्ची बात बताऊं।
कहे सुदर्शन मौत सभी को आनी,
सभी सौदे झूठे जगत में यही सच्ची कहानी,
कर लो भला हर किसी का मानुष्य योनी में बार-बार समझाऊं,
आओ सभी को सच्ची बात बताऊं।
