STORYMIRROR

Aarti Sirsat

Romance

4  

Aarti Sirsat

Romance

मौहब्बत फिर से जवाँ हो गयीं

मौहब्बत फिर से जवाँ हो गयीं

1 min
365

ख्वाब देखे थे जो बरसों पहले

आज भी वो कायम है....

बूढे हुए तो क्या हुआ धड़कन

में धड़कता आज भी तेरा नाम है....


इश्क़ के नाम पर हम तो 

हर गली में बदनाम हैं ....

है तू साथ मेरे तो मुझे अब 

जिन्दगी से कैसी शिकायत 

तेरे नाम से ही तो मेरा नाम है....


मैं तो करता हूँ खुलकर 

अपने इश्क़ का ऐलान....

लाज तो कब की हवा हो गयी....

कंपकपाते उसके हाथ जो पड़े

इन कंपकपाते हाथों में.....

लगा ऐसा.... जैसे 

मौहब्बत हमारी फिर से जवाँ हो गयीं....


संग तेरे साथिया जीवन ये सारा

मेरा बीत जाने दे....

बचे हैं जिन्दगी के जितने भी 

पल तेरे संग जीने दे....

हाथों में हाथ 

तेरा रहने दे.....

सुख रहें या दुख रहें,

सब संग तेरे ही सहने दे!


      


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance