मैं तुम हो गई
मैं तुम हो गई
जब से तुमको देखा, तुम्हारी बावरी हो गई हूँ,
तुम्हें नज़र ना लगे तो काजल सावरी हो गई हूँ।
तुम मुस्काओ तो आँखें मेरी चमकतीं हैं,
तुम सामने आओ तो मेरे चेहरे की हर एक कोशिका दमकती हैं।
सच कहूँ तो ना जाने मैं कहाँ गुम हो गई हूँ,
जब से तुमको जाना, मैं तो बस तुम हो गई हूँ।
तुम्हारे एहसास में तो नीम भी गुलाब सा महकता है,
और बरामदे में आऊँ तो कौआ भी गौरैया सा चहकता है।
जबसे तुम मेरी नज़रों में बसे, दुनिया अधिक सुंदर लगती है,
दिन खोए - खोए से और रातों की नींद भी मुझ संग जगती है।
अब तो भीड़ के शोर में भी प्रेम गीत की धुन हो गई हूँ,
जबसे तुम्हारा स्वर सुना, मैं तो बस तुम हो गई हूँ।
तुम्हारे नाम से ज़िंदगी को रोज़ सजाती हूँ,
ख्यालों में तुम्हारे मैं बस खो जाती हूँ।
अकेली बैठी-बैठी मुस्काती रहती हूँ,
कोई हाल-चाल पूछे तो भी तुम्हारा नाम कहती हूँ।
अब तो बोलती हुई भी मैं गुम-सुम हो गई हूँ,
जब से मन में तुमसे बातें करी, मैं तो बस तुम हो गई हूँ।

