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Dr Baman Chandra Dixit

Romance

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Dr Baman Chandra Dixit

Romance

मैं हाँ समझ लूंगा

मैं हाँ समझ लूंगा

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ना ना न कहो, मैं हाँ समझ लूंगा

नज़रें न झुकाओ मैं हाँ समझ लूंगा।।


अगर झूका ली तो समझा दो पलकों को

रुक कर उठे तो मैं हाँ समझ लूंगा।।


होंठों को तेरी, तेरे दाँतों से बैर तो नहीँ

न दबा नाज़ुक हैं ये मैं हाँ समझ लूंगा।।


हँसी आती है तो हँसो खिलखिला कर

रुक देती हो क्यों मैं हाँ समझ लूंगा।।


ना ना कहती रहो उनको सुना कर

फिकर ना करो मैं हाँ समझ लूंगा।।

  



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