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Komal Kamble

Children

4  

Komal Kamble

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मां

मां

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खुद के गमों को भुलाकर

मेरे दुखों को संंवारती

खुद के आंसुओं को छुपाकर

मेरे अश्कों को दुलारती।


खुद की भूूख को मारकर

मुझे भरपेट खिलाती

हर मुश्किल, आंधी, तूफानों में

अपने आंचल में छुुुपाती।


कभी पडूं बिमार मैं

तो उसे नींद न आती

कभी देख चोट मेरी 

उसकी आंखें भर आती।


मेरी खुशियों के लिए

उसने अपनी खुशियां कुर्बान की

अपनी जिंदगी कुर्बान कर

मेरी जिंदगी संवार दी।


मां जैसा कोई नहीं

मां के बिना कुछ नहीं

जिसके पास मां नहीं

समझो उसकी जिंदगी उजड़ गई।


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