STORYMIRROR

Apoorva Singh

Abstract

3  

Apoorva Singh

Abstract

माँ

माँ

1 min
234

क्या कहूं तेरी तारीफ में माँ

अल्फ़ाज़ कम पड़ जाएंगे

ममता का बता तेरी क्या मोल

ताउम्र ना चुका पाएंगे

तू ही मेरा ईश्वर मेरा जहान है

तू ही मेरा मान मेरा अभिमान है

तेरी छांव में है सारी कायनात बसी

तू ही मेरा गुरूर तू ही मेरी जान है

याद आते हैं मुझे वो सारे पल

जब तूने घंटों लोरी गाया था

बना के झूला साड़ी से

दिन दिन रात झुलाया था

कहीं ना लगे मक्खी मुझको

आंचल में भी छुपाया था

कैसे ये कर्ज आखिर उतर पाएंगे

एक जन्म तो क्या सात भी कम पड़ जाएंगे

तेरी एक मुस्कान की खातिर

उस रब से भी लड़ जाऊंगा

हां हां भाई पूजूंगा उस पत्थर की मूरत को भी

पर सबसे पहले तेरे सजदे में सिर झुकाऊंगा ।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract