SARVESH KUMAR MARUT
Drama Action Inspirational
मैं भूल गया अपने ग़म को,
जब माँ ने मुझे पुकारा था।
मैं जीत गया सारी दुनिया,
मैंने जब-जब शीश नवाज़ा था।
मेरी माँ की सेवा में भले ही,
चाहें ज़िस्म लहू ही बिक जाए।
सज़दे करूँ मैं सौ-सौ बारों,
मेरा इसके बिना संसार कहाँ ?
प्रतीक राष्ट्...
राष्ट्रीय प्र...
कली नोंची गयी
कागा
बसंत आया
चले चलो
मैं पत्थर की ...
मैं नन्हीं-सी...
मैं पानी हूँ
मैं नन्हीं सी...
मुझे खुशी होगी तब, जब इस देश से इन शत्रुओं का, नामोंनिशान मिटाकर, आराम से धरती की गोद में, मिट्टी मे... मुझे खुशी होगी तब, जब इस देश से इन शत्रुओं का, नामोंनिशान मिटाकर, आराम से धरती क...
जीवन का दर्शन कराती यह कविता मनुष्य को उसके अस्तित्व के बार में बताती है । जीवन का दर्शन कराती यह कविता मनुष्य को उसके अस्तित्व के बार में बताती है ।
कितनी बार ? वही पुरानी बात वही हालात कहूँ मैं... कितनी बार ? वही पुरानी बात वही हालात कहूँ मैं...
इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी। इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी।
लंका में अग्निकांड भी मैं था लंका में अग्निकांड भी मैं था
एकांत में भी हिन्दी को अपने पास ही पाया... एकांत में भी हिन्दी को अपने पास ही पाया...
ये 'बाबुल' सदा तेरे साथ है, जब-जब याद करेगी, अपने आस-पास ही पाएगी... ये 'बाबुल' सदा तेरे साथ है, जब-जब याद करेगी, अपने आस-पास ही पाएगी...
अब डर नहीं लगता, किसी के दूर जाने का, अब दिल नहीं करता, किसी से जुड़ जाने का...! अब डर नहीं लगता, किसी के दूर जाने का, अब दिल नहीं करता, किसी से जुड़ जाने का...!
इस बार सबको अनदेखा कर उनका हाथ थामना जिनको बस अपनों की तलाश है इस बार सबको अनदेखा कर उनका हाथ थामना जिनको बस अपनों की तलाश है
देख-ए-इंसान, तेरे देश का हाल क्यूँ बदहाल है... देख-ए-इंसान, तेरे देश का हाल क्यूँ बदहाल है...
मैं शब्दों की दुनिया में आया हूँ मनुष्य जाति की ओर से उनका शुक्रिया अदा करने। मैं शब्दों की दुनिया में आया हूँ मनुष्य जाति की ओर से उनका शुक्रिया अदा करने।
कई बार दोस्तों से खेल खेल में कट्टी और फिर अब्बा किया करते थे कई बार दोस्तों से खेल खेल में कट्टी और फिर अब्बा किया करते थे
हाँँ ! वो उड़ना चाहती है उड़ना चाहती है गिरना चाहती है गिरकर उठना चाहती है पर वो रुकना नही चाहती, बस व... हाँँ ! वो उड़ना चाहती है उड़ना चाहती है गिरना चाहती है गिरकर उठना चाहती है पर वो र...
यातनाएं सही तन और मन पर गहरी पीड़ा सही, यातनाएं सही तन और मन पर गहरी पीड़ा सही,
चाहे कितना घनघोर अँधेरा छाया है कर्मवीरों ने अमावस को पूनम बनाया है। चाहे कितना घनघोर अँधेरा छाया है कर्मवीरों ने अमावस को पूनम बनाया है।
अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर ! अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर !
इस द्रौपदी की गिरधारी तक काहे ना पहुंचे पुकार है, इस द्रौपदी की गिरधारी तक काहे ना पहुंचे पुकार है,
उसके प्रांगण में दौड़ता मेरा वर्तमान थम जाता है, तब मेरा गाँव मुझे याद आता है। उसके प्रांगण में दौड़ता मेरा वर्तमान थम जाता है, तब मेरा गाँव मुझे याद आता है...
मैंने इंसान की जान को कुछ रुपयों में बिकता देखा है मैंने एक हसीन ज़माने को तहस नहस होता देखा है...... मैंने इंसान की जान को कुछ रुपयों में बिकता देखा है मैंने एक हसीन ज़माने को तहस...
क्योंकि कुछ चीज़ों का कभी बँटवारा नहीं होता ! क्योंकि कुछ चीज़ों का कभी बँटवारा नहीं होता !