SARVESH KUMAR MARUT
Abstract Inspirational
बढ़े टेढ़े घनेरे,
कभी साथ तेरे।
कभी साथ मेरे,
तम नाश होगा।
तुम बढ़ते चलो,
न समझो अकेले।
जलना तुम्हें है,
जीवन सफ़र में।
अनजान राह पर,
ख़ुद देकर के फेरे।
रुकना तुझे सिर्फ़ ,
है वहाँ जब हों सवेरे।
चले चलो- चले चलो,
तुम नेक राह को घेरे।।
कली नोंची गयी
कागा
बसंत आया
चले चलो
मैं पत्थर की ...
मैं नन्हीं-सी...
मैं पानी हूँ
मैं नन्हीं सी...
माँ
ओ !गौरैया-ओ !...
शायरी सिर्फ आशिकी की ही नही मसले न जाने हैं यहां और कितने। शायरी सिर्फ आशिकी की ही नही मसले न जाने हैं यहां और कितने।
सृजनशीलता की विजय है, जगत के संगीत की पहचान है। सृजनशीलता की विजय है, जगत के संगीत की पहचान है।
जीवन सारी बीती महलों में अंत समय में कचरा जीवन सारी बीती महलों में अंत समय में कचरा
नंदी जी पर सवार हो तीनों लोक घूम आते। नंदी जी पर सवार हो तीनों लोक घूम आते।
कहानियां बदलती रहेंगी मेरे साथ साथ! कहानियां बदलती रहेंगी मेरे साथ साथ!
रहें न हम इससे अनभिज्ञ है यही अनुभूति हमारे जीवन का आधार। रहें न हम इससे अनभिज्ञ है यही अनुभूति हमारे जीवन का आधार।
वृक्षों और सुंदर जानवर से भरा, जंगल बहुत ही सुंदर लगता है। वृक्षों और सुंदर जानवर से भरा, जंगल बहुत ही सुंदर लगता है।
हाले ग़म कह ना सकें बज़्म ए सुख़न। 'मीरा' गाती थी ऋचाएं क्या हुईं।। हाले ग़म कह ना सकें बज़्म ए सुख़न। 'मीरा' गाती थी ऋचाएं क्या हुईं।।
शामिल खुदा की जात में करना होता है बड़ा गुनाह। शामिल खुदा की जात में करना होता है बड़ा गुनाह।
निस्वार्थ भाव -सा प्रेम होता है इनका निस्वार्थ भाव -सा प्रेम होता है इनका
शक्ति पवन चक्की की तरह ऊर्जा में परिवर्तित होकर बन जाती है रीते मन की पवन चक्की शक्ति पवन चक्की की तरह ऊर्जा में परिवर्तित होकर बन जाती है रीते मन ...
वैसे ही क्या ये दुनिया बिना नारी के चल पाएगी? वैसे ही क्या ये दुनिया बिना नारी के चल पाएगी?
कितनी रंगबिरंगी और कितने रंगोंवालियाँ हैं। कितनी रंगबिरंगी और कितने रंगोंवालियाँ हैं।
एक रोटी की कीमत हम क्या तुम्हें बताएं रोटी की चाह में इंसान दर-दर ठोकरें खाये। एक रोटी की कीमत हम क्या तुम्हें बताएं रोटी की चाह में इंसान दर-दर ठोकरें खाये...
रूस, यूक्रेन, ताइवान सब फँस चुके हैं समस्या से रूस, यूक्रेन, ताइवान सब फँस चुके हैं समस्या से
कलिघाट कलाकारों ने हंसाया इसको, धृष्टता और उज्ज्वलता के परिणाम को , कलिघाट कलाकारों ने हंसाया इसको, धृष्टता और उज्ज्वलता के परिणाम को ,
आकार निर्माण एवं विवरण में इसके जरूर आई है विभिन्नता, आकार निर्माण एवं विवरण में इसके जरूर आई है विभिन्नता,
गरीबी इन गरीबों को पैरों तले, हर लम्हा रौंधती है। गरीबी इन गरीबों को पैरों तले, हर लम्हा रौंधती है।
मौत आ जाए इसमें मुर्गे को पर चाहिए इनको, जीत की चाबी। मौत आ जाए इसमें मुर्गे को पर चाहिए इनको, जीत की चाबी।
बताते हैं पहले मुर्गे की चोंच चाकू से थी तराशी जाती । बताते हैं पहले मुर्गे की चोंच चाकू से थी तराशी जाती ।