माँ
माँ
मंदिर हो, मस्जिद हो या हो गुरुद्वारा।
हर भगवान मुझे पहचानता है।
मेरी मां का बेटा कहकर पुकारता है।
आज मैंने कुदरत का करिश्मा देखा है ।
सितारों से जड़े आसमान में मां का दुपट्टा देखा है।
दुख के एक आँसू को माँ
खुशियों के सौ आँसुओं में बदल देती है।
माँ की दुआएँ हर तकलीफ
शर्मसार कर देती है।
माँ का हाथ जब मेरे हाथ में होता है।
तो हाथों की लकीरें बदल जाती है।
उसकी दुआओं से हर तकलीफ
शर्मसार हो जाती है।
हर मुसीबत से निकाल लाती है।
माँ साथ नहीं होती,
फिर भी जान जाती है।
माँ का साथ हो तो
दुश्मनों की जड़े हिल जाती है।
माँ के एक शब्द से
दुश्मनी टूट जाती है।
उजाड़ सी हवेली थी जो अब तलक।
माँ के कदम पड़ते ही मंदिर हो गई ।
आँसू सूख गए थे जो कभी ।
यूँ निकले कि गंगा बह गई।
बुलंदियों को छुआ तो भी माँ का साया था।
सितारों से जड़ा आसमान माँ के दुपट्टे जैसा था
