STORYMIRROR

Kanchan Prabha

Abstract Classics Inspirational

4  

Kanchan Prabha

Abstract Classics Inspirational

माँ सरस्वती

माँ सरस्वती

1 min
312

हे हंस वाहिनी माता 

तेरे शरण में जो भी आता

पुष्प चढ़ा कर करें नमन हम

आशीर्वाद् से छूं पाएं गगन हम


सुर की देवी तू कहलाती 

हर बच्चे के मन को भाती

छात्र करे पूजन सब तेरे

दुख दूर हो जाये मेरे


हो जाये परिपूर्ण ज्ञान से

करे अध्ययन वो बड़े ध्यान से

तेरी वीणा से जो निकले संगीत

मन को मुग्ध करे वो गीत


ज्ञान दायिनी तू वीणा वादिनी

चन्द्र कमल स्वेत वस्त्र धारिनी

अम्ब विमल मति दे अज्ञानी को

मधुर बनाये शख्त वाणी को


बसंत ऋतु में तू आती है

छात्रों के हृदय बस जाती है

आशीर्वचनों से माँ तेरे

सबकी नैया पार लग जाती है





Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract