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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Inspirational

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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Inspirational

माँ क्यों ऐसी होती है ?

माँ क्यों ऐसी होती है ?

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माँ क्यों ऐसी है होती ? 

छिप-छिप कर वे रोती 

बच्चे से हो यदि नाराज

दूसरा डांटे तो हो बाज


डांट कर भी खुद रोती

अपना आंचल भिगोती

गलती भी ढक ये जाती

अपने हाथों में झुलाती


अपने आगे ये देती सजा

सुनती न फिर कोई रजा

नौ माह पेट में है रखती

बच्चे के हित सब सहती


माँ क्यों ऐसी है होती ?


वक्त पड़े ये शेरनी होती 

शिक्षा के बीज है बोती

धरती को भी कहते मां 

जीवन की ज्योति है माँ


कैसी-कैसी सुना कहानी

भूल हमारी सब नादानी

रोते बच्चे को ये हंसाती 

जान कुर्बान ये कर जाती


मां बिन जीवन है अधूरा

ममता मां की करती पूरा

माँ विपदा पर होती भारी

माँ जग में है सबसे न्यारी


माँ क्यों ऐसी है होती ?

रजा--मरजी


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