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Shailaja Bhattad

Abstract Inspirational

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Shailaja Bhattad

Abstract Inspirational

माँ जगदम्बा

माँ जगदम्बा

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मां की छवि नव रूप की, हर रूप का विधि विधान।

हर रूप का संदेश है, हर रूप का दंड विधान।

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जय अंबे की आरती।

कन्याएँ उतारती।

साधना निखारती।

 भक्ति है पुकारती।

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चूड़ी बिंदिया चुनरी साजे।

ढोल मृदंग डमरू बाजे।

अंतर मन शीतल हो झांके।

 चंदन का टीका सर साजे।

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माता रानी की कृपा, मां की जय जयकार।

माता का वृतांत, मां का सोलह श्रृंगार।

हरियाली फिर आएगी, जवारों ने जगाया विश्वास।

आया अति पावन त्यौहार माता रानी का त्यौहार।

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जौ के जवारे बोकर माता का कलश बिठाया।

सुख समृद्धि भी देखो साथ में लेकर आया।

माता में जागी आस, हर श्वास को जगाया।

माता के कीर्तन ने जन जन को शील बनाया।

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अन्तर्मन की शुद्धता, नौ दिन का प्रताप है

दिन-रात के जाप से, कर्म होते निष्पाप है।

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 मां की जय जयकार है।



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