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Dhirendra Panchal

Tragedy


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Dhirendra Panchal

Tragedy


माई

माई

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पाती भेजववले बानी भउजी मोर रोवतानी ,

लिखतानी परसों से बाबू जी ना सुतल बानी ,

सांस फुलताटे नइखे माई के दवाई बा ।

कइसे कहीं बबुआ बेमार मोर माई बा ।।


नइखे अब किसानी में कमाई कचरकुट बा ,

लागता की हमनी बीचे डालत केहू फुट बा ,

भइया के समइया बिगरल राम लेखा भाई बा ।

कइसे कहीं बबुआ बेमार मोर माई बा ।।


दु दु गो भतीजा चहकें अंगना दुआर पे ,

कहे न सों चाचा अइहें अबकी त्योहार पे ,

होखे वाला बाटे छोटकी बहिन के बिदाई बा ।

कइसे कहीं बबुआ बेमार मोर माई बा ।।


जी ना पाइब ताना मारी लोगवा जहान हो ,

माई ना बस माई होलीं होलीं भगवान हो ,

उनकर रहल हमहन खातिर दुआ आ दवाई बा ।

कइसे कहीं बबुआ बेमार मोर माई बा ।




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