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Dhirendra Panchal

Romance

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Dhirendra Panchal

Romance

सबको राह दिखाएँ कैसे

सबको राह दिखाएँ कैसे

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जिसका मन व्याकुल ना हो 
हम उसको प्रेम सिखाएं कैसे ?
जिसमें बाकि तड़प नहीं है 
उसको गले लगाएं कैसे ?

जिसमें बाकि बचा न हो 
नरमाहट,आहत हो जाने दो 
उसके मन की फूलवारी तक 
माली को पहुंचाएँ कैसे ?

चित्कार हृदय में रहने दो 
उल्लास कंठ तक मत लाओ 
कुछ ख़ामोशी भी जायज है 
एक एक बात बतायें कैसे ?

चलने वाली हृदय गति को 
बार बार मैंने समझाया 
मन के मरुथल में अपने हम 
एक एक पेड़ उगाएं कैसे ?

कुछ बूंद आँखों से बाहर 
आकर ये सिखलाती हैं 
बन्द कमरे में पड़े पड़े हम 
अनुभव को पढ़ पाएं कैसे ?

दिशाहीन हैं खुद की साँसे
सबको राह दिखाएँ कैसे ?

~ धीरेन्द्र पांचाल 





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