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Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy

लोकडाउन में कालाबाजारी

लोकडाउन में कालाबाजारी

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लोकडाउन में घर पर क्या रहा

कालाबाजारी देखकर रोता रहा


एक रुपये की चीज के दो रुपये,

बस ऐसे बेईमानों को सहता रहा


कोविड19 जैसी की महामारी में

इनको अपना पेट भरना याद रहा


मजलूमों पर ये रहम नहीं करते थे,

इनको बस अपना घर याद रहा


लोकडाउन में घर पर क्या रहा

कालाबाजारी देखकर रोता रहा


ख़ुदा का इनको ख़ौफ़ नहीं है,

इनको कोई रोक-टोक नहीं है,


ये बेईमान बस हमको रात-दिन

देश मे रहकर यूँही लूटता रहा


पर जैसा करेंगे वैसा ही ये भरेंगे

ये कोरोना वायरस से संक्रमित होंगे


ये लोगो की बद्दुआओं से जलेंगे

में इनकी मूर्खता पर हँसता रहा


चुपचाप इस लोकडाउन मे,

बेईमानों के करतब देखता रहा


लोकडाउन में घर पर क्या रहा

कालाबाजारी देखकर रोता रहा



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