STORYMIRROR

writersurya Perke

Tragedy

4  

writersurya Perke

Tragedy

आईना

आईना

1 min
321

लिखता हूँ मै जो वो मेरे दिल कि आवाज है

मेरा लिखा जो पढ़े कोई खुश तो कोई नाराज है

यहा बात सच की हो रही है जनाब

झूटों कोई काम नहीँ

कुछ हैं सच बोलने वाले यहां लेकिन

उनका कोई नाम नहीं

झूंट कंधे पर उठाया जाता है

सच पैरों तले छुपाया जाता है

झूटों का झूठ सच साबित करने को

बुलाते हैं सब सच बोलने वाले को

झूठ का बाज़ार हर तरफ दिखता है

सच न जाने कहा जाके बिकता है

हमने भीड़ मे उतारें झुट के नकाब

हम सच्चाई को रोक न पाए

हम तो आईने मे खुद को देख रहे थे जनाब

आप क्यों अपना सर् बीच मे ले आए.


రచనకు రేటింగ్ ఇవ్వండి
లాగిన్

Similar hindi poem from Tragedy